अगर आप एजेंसी चलाते हैं या उसमें काम करते हैं, तो “क्या AI हमारी नौकरियाँ छीन लेगा?” का ईमानदार जवाब यह है: वह टास्क छीन रहा है, और सबसे पहले वही टास्क छीन रहा है जो हम जूनियर्स को दिया करते थे। इसलिए एंट्री-लेवल भूमिका सबसे ज़्यादा दबाव में है। इस दौर से अच्छी तरह निकलने वाली एजेंसियाँ चुपचाप ग्रेजुएट भर्ती बंद नहीं करेंगी, बल्कि जूनियर नौकरियों को विवेक के इर्द-गिर्द नए सिरे से गढ़ेंगी।
जो बात अब तक दबी ज़बान में कही जाती थी, वह अब खुलकर कही जा रही है। अपने AI Marketing Strategies इवेंट के दौरान एक टाउन हॉल में Digiday ने एक छोटी-से-मझोली परफ़ॉर्मेंस एजेंसी के मालिक को यह कहते सुना: “हमने काफ़ी समय से कॉलेज से निकले ग्रेजुएट्स को नौकरी पर नहीं रखा है, और मुझे नहीं लगता कि आगे रखेंगे।” Digiday की रिपोर्ट छपने के एक दिन बाद Marketing Dive ने Gartner के इस अनुमान की ख़बर दी कि 2030 तक ज़्यादातर हाई-परफ़ॉर्मिंग मार्केटिंग टीमें पारंपरिक एंट्री-लेवल नौकरियाँ खत्म कर देंगी।
क्या AI सच में एजेंसी की नौकरियाँ छीन रहा है?
कुछ हद तक, हाँ। आँकड़े सुर्ख़ियों जितने डरावने नहीं हैं, लेकिन ज़्यादा सटीक हैं। Gartner ने जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 1,303 वरिष्ठ मार्केटिंग लीडर्स का सर्वे किया। Marketing Dive के मुताबिक, 18% ने AI की वजह से कुछ पद पहले ही खत्म कर दिए थे। सोलह प्रतिशत ने नई भूमिकाएँ बनाई थीं। लगभग एक-तिहाई ने मौजूदा कामकाज को नए सिरे से ढाला था।
देखिए कि सबसे बड़ा आँकड़ा किसका है: कामकाज को नए सिरे से ढालने का। ज़्यादातर संगठन विभाग खत्म नहीं कर रहे; वे यह बदल रहे हैं कि उन विभागों में लोग क्या काम करते हैं। जो नौकरियाँ गायब हो रही हैं, वे असल में दोहराए जाने वाले कामों का एक पुलिंदा थीं, जिन पर बस एक पदनाम चिपका दिया गया था।
Digiday में जिन एजेंसी मालिक का बयान छपा, वे ग्रेजुएट्स के ख़िलाफ़ नहीं थे। उनकी फ़र्म पहले सिर्फ़ एंट्री-लेवल टैलेंट को ही भर्ती करती थी, और उनमें से ज़्यादातर लोग आगे चलकर उसके सबसे अच्छे कर्मचारियों में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “यह बस एक कारोबारी मसला है।” यही असली जाल है: ऐसा फ़ैसला जो एक साल के P&L के लिहाज़ से तर्कसंगत है, लेकिन अगले दशक की टैलेंट बेंच को अंदर से खोखला कर देता है।
एजेंसी की कौन-सी भूमिकाएँ AI के सबसे ज़्यादा निशाने पर हैं?
पदनामों के हिसाब से सोचना छोड़ें और टास्क के हिसाब से सोचना शुरू करें। हर एजेंसी में ऐसे कामों की एक लंबी सूची होती है जो जूनियर्स के घंटे खा जाते हैं: टाइमशीट, मासिक रिपोर्ट, स्टेटस मीटिंग, बजट ट्रैकिंग, मैनुअल रीसाइज़िंग, प्रतिस्पर्धी ऑडिट। यही वे काम हैं जिन्हें अब AI और ऑटोमेशन बख़ूबी संभालते हैं। विवेक, रचनात्मक परख और क्लाइंट का भरोसा इस सूची में नहीं हैं।
क्रिएटिव, मीडिया या सोशल एजेंसी में एक आम जूनियर का काम कुछ इस तरह बदलता है।
| जूनियर का आज का काम | अब AI क्या करता है | जूनियर को इसके बजाय क्या करना चाहिए |
|---|---|---|
| मासिक परफ़ॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार करना | आँकड़े निकालता है और कमेंटरी का मसौदा तैयार करता है | उस एक बदलाव को पहचानें जो मायने रखता है और उसे क्लाइंट को समझाएँ |
| स्क्रीनशॉट के ज़रिए प्रतिस्पर्धी ऑडिट | प्रतिस्पर्धियों के विज्ञापन और पोस्ट इकट्ठा करके उन्हें समूहों में बाँटता है | तय करें कि प्रतिस्पर्धी का कौन-सा कदम ख़तरा है और कौन-सा महज़ शोर |
| सोशल लिसनिंग का सारांश | बातचीत को विषयों में समूहबद्ध करता है | परखें कि कोई विषय ऑडियंस का असली तनाव है या किसी मुखर अल्पसंख्यक की आवाज़ |
| हर फ़ॉर्मेट के लिए एसेट्स को रीसाइज़ करना | वेरिएंट्स तैयार करता है | ब्रांड से मेल जाँचें और जो कुछ गलत दिखे, उसे पकड़ें |
| स्टेटस मीटिंग के नोट्स और एक्शन पॉइंट्स | कॉल को ट्रांसक्राइब करता है और एक्शन पॉइंट्स की सूची बनाता है | उस फ़ैसले के पीछे लगें जिसकी वजह से काम अटका है |
दाईं ओर का कॉलम बीच वाले कॉलम से ज़्यादा कठिन है। लेकिन यह ज़्यादा दिलचस्प भी है, क्लाइंट्स की नज़र में ज़्यादा आता है और कारोबार को सीखने का कहीं तेज़ रास्ता है।
ग्रेजुएट भर्ती में कटौती घाटे का सौदा क्यों है?
आज का अकाउंट एग्ज़ीक्यूटिव 2032 का अकाउंट डायरेक्टर है। अगर आप निचले स्तर पर भर्ती बंद करेंगे, तो पाँच साल बाद आपको ऊपरी स्तर पर अनुभवी लोग बाज़ार से खरीदने पड़ेंगे, और वह भी कहीं ज़्यादा पैसे वाले होल्डिंग नेटवर्क्स से होड़ करते हुए। एक स्वतंत्र एजेंसी के लिए यह घाटे का सौदा है।
Marketing Dive की रिपोर्ट के अनुसार CMO को दी गई Gartner की सलाह एजेंसी लीडर्स पर भी उतनी ही लागू होती है: AI से मिली दक्षता को नए टैलेंट को पाइपलाइन से बाहर करने का बहाना न बनाएँ। Gartner में वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट Kristina LaRocca-Cerrone ने इसे सीधे शब्दों में कहा: “CMO को चाहिए कि वे जूनियर मार्केटर्स को ज़्यादा मूल्यवान काम का अनुभव पहले ही दे दें।” Gartner के उदाहरण काम के हैं: AI आउटपुट का मूल्यांकन करना, इनसाइट्स तैयार करना और सिफ़ारिशों को मापे जा सकने वाले नतीजों से जोड़ना।
Digiday टाउन हॉल में मौजूद एक प्रतिभागी ने इसे ज़्यादातर कंसल्टेंट्स से बेहतर ढंग से रखा: “यह टेक्नोलॉजी की नहीं, बल्कि सीखने और विकास की चुनौती लगती है।”
AI की वजह से काबिल लोग भी खुद को धोखेबाज़ क्यों महसूस करने लगते हैं?
यहाँ एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी है, जिसे ज़्यादातर AI रोडमैप नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मनोवैज्ञानिक इसे इम्पोस्टर फ़िनॉमिनन कहते हैं: यह लगातार बना रहने वाला एहसास कि आप उतने सक्षम नहीं हैं जितना लोग सोचते हैं और जल्द ही आपकी पोल खुल जाएगी, चाहे सबूत कुछ भी कहें।
एजेंसियाँ इसके लिए उपजाऊ ज़मीन हैं। जूनियर्स अक्सर छोटे-मोटे कामों में अपनी रफ़्तार और सहनशक्ति के बल पर अपनी काबिलियत साबित करते हैं। वह काम छिन जाए, तो बहुत से लोगों को लगता है कि उनके पास दिखाने को कुछ बचा ही नहीं। सीनियर्स भी इससे अछूते नहीं हैं। Digiday इवेंट में एक प्रतिभागी ने इस डर को यूँ बयान किया: “AI आपकी नौकरी लेने नहीं आ रहा। आपकी नौकरी लेने वह आ रहा है जो AI जानता है और जिसके पास आपके जितना अनुभव है।”
जो लोग खुद को धोखेबाज़ महसूस करते हैं, उनका व्यवहार काफ़ी हद तक अनुमान के मुताबिक होता है। वे काम पूरा करके भेजने के बजाय उसे बार-बार चमकाते रहते हैं। वे मीटिंग में ज़ाहिर-सा सवाल नहीं पूछते। वे अनिश्चितता को उजागर करने के बजाय उसे छिपाते हैं, और AI आउटपुट की जाँच करने वाले व्यक्ति से आप ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। जहाँ असुरक्षा घटती है, वहाँ सच्चाई पनपती है। लोगों को एक स्पष्ट और सम्मानित भूमिका दें, और अपने सवालों के जवाब खुद खोजने के टूल्स दें, तो वे अपनी असली राय सामने रखने लगते हैं।
AI के दौर के लिए एजेंसी में जूनियर भूमिका को नए सिरे से कैसे गढ़ें?
छोटे स्तर से शुरुआत करें: एक टीम, एक क्लाइंट, एक तिमाही।
- उबाऊ कामों का ऑडिट करें। जूनियर्स महीने भर में जो भी दोहराए जाने वाले काम करते हैं, उनकी सूची बनाएँ और हर काम में लगने वाले घंटे लिखें। उन कामों पर निशान लगाएँ जिन्हें अब AI या ऑटोमेशन संभाल सकता है।
- जॉब डिस्क्रिप्शन को आउटपुट के बजाय सवालों के इर्द-गिर्द दोबारा लिखें। “मासिक रिपोर्ट तैयार करता है” की जगह लिखें “क्लाइंट को समझाता है कि क्या बदला और क्यों”।
- मशीन की जाँच को एक घोषित स्किल बनाएँ। जूनियर्स को AI आउटपुट को सोर्स डेटा से मिलाकर जाँचने की स्पष्ट ज़िम्मेदारी दें, और जब वे कोई गलती पकड़ें तो उसका श्रेय उन्हें दें।
- हर जूनियर को हर हफ़्ते क्लाइंट से जुड़ा एक सवाल दें। कोई असली सवाल, जैसे “प्रतिस्पर्धी के नए कैंपेन पर एंगेजमेंट अचानक क्यों बढ़ा?”, जिसका जवाब सबूतों के साथ दिया जाए और किसी सीनियर के सामने प्रेज़ेंट किया जाए।
- जूनियर्स को सीनियर्स के साथ जोड़ें। Digiday के एक प्रतिभागी ने ध्यान दिलाया कि अनुभवी स्टाफ़ के पास “इस बारे में ऐतिहासिक जानकारी होती है कि अंदरखाने असल में काम कैसे होता है”। जूनियर्स टूल्स के साथ सहजता लेकर आते हैं। सीखने-सिखाने का यह लेन-देन दोनों तरफ़ से हो।
- विवेक देखकर भर्ती करें। Gartner सुझाव देता है कि उम्मीदवारों का आकलन इस आधार पर किया जाए कि वे AI के साथ कैसे काम करते हैं, जिसमें उनकी आलोचनात्मक सोच भी शामिल है। AI से तैयार किए गए किसी विश्लेषण पर आधारित एक टास्क दें, जिसमें जानबूझकर एक गलती छोड़ी गई हो, और देखें कि उसे कौन पकड़ता है।
एजेंसी लीडर्स को अभी अपनी टीमों से क्या कहना चाहिए?
सच, और साथ में एक योजना। लोगों से यह कहना कि कुछ नहीं बदलेगा, भरोसे लायक नहीं है। उनसे यह कहना कि AI सब कुछ कर देगा, सच नहीं है। Digiday इवेंट में एक एग्ज़ीक्यूटिव ने एक समझदारी भरा क्रम बताया: पहले त्वरित सफलताएँ, फिर बदलाव की रफ़्तार को लेकर स्पष्टता, और उसके बाद औपचारिक ट्रेनिंग।
टूलिंग भी मायने रखती है। अगर क्लाइंट और कैटेगरी डेटा तक पहुँचने का इकलौता रास्ता चालीस फ़िल्टर वाला डैशबोर्ड है, तो जूनियर्स सोचने के बजाय डेटा जुटाते ही रह जाएँगे। Defy MCP की मदद से टीम Claude के अंदर ही उस डेटा की पड़ताल कर सकती है और उसे किसी सहकर्मी की तरह प्रॉम्प्ट कर सकती है, बिना कोई डैशबोर्ड सीखे। इससे अप्रेंटिसशिप “जाओ, आँकड़े ले आओ” से बदलकर “जाओ, पता करो कि ऐसा क्यों हुआ” बन जाती है। यही वह काम है जिससे स्ट्रैटेजिस्ट तैयार होते हैं, और Defy प्लेटफ़ॉर्म में आप देख सकते हैं कि यह कहाँ फ़िट बैठता है।
जो एजेंसियाँ जूनियर्स की भर्ती रोकेंगी, वे इस साल वेतन की एक मद बचा लेंगी। जो सीढ़ी को फिर से बनाएँगी, टैलेंट की अगली पीढ़ी उन्हीं की होगी।



